हाइड्रोजन और एटम बम में कौन ज्यादा खतरनाक? राहुल के ऐलान के बाद उठे सवाल

हाइड्रोजन बम में पूरे के पूरे शहर को नष्ट करने की क्षमता होती है. इसे सिटी किलर भी कहते हैं. वहीं एटम बम कितनी तबाही लाता है ये दुनिया देख चुकी है. जापान के हिरोशिमा

हाइड्रोजन और एटम बम में कौन ज्यादा खतरनाक? राहुल के ऐलान के बाद उठे सवाल
Reported by Sharad

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने बीजेपी को चेतावनी देते हुए कहा है कि वह एटम बम से भी बड़ा हाइड्रोजन बम फोड़ने वाले हैं. उन्होंने कहा, बीजेपी सुन लो एटम बम से बड़ा है हाइड्रोजन बम. अब तैयार हो जाओ हाइड्रोजन बम आ रहा है. राहुल के इस बयान पर बीजेपी ने पलटवार किया. पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि एटम बम और हाइड्रोजन बम का चुनाव से क्या संबंध है. उन्होंने राहुल से सवाल किया कि आप खुद को इतना हल्का क्यों बना रहे. आप विपक्ष के नेता के पद पर बैठे हैं. आपका आचरण वहां पर बैठकर कुछ तो मर्यादित होगा.

किसी भी देश द्वारा युद्ध में हाइड्रोजन बम का इस्तेमाल नहीं किया गया है. विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें एक पूरे के पूरे शहर को नष्ट करने और पहले से ही शक्तिशाली परमाणु बम की तुलना में कहीं अधिक लोगों को मारने की शक्ति है. बता दें कि 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका द्वारा हिरोशिमा पर दुनिया का पहला परमाणु बम गिराए जाने और उसके तीन दिन बाद नागासाकी पर एक और परमाणु बम गिराए जाने के बाद जापान में 2,00,000 से ज़्यादा लोग मारे गए थे. इन दोनों शहरों में हुए बम विस्फोट इतने विनाशकारी थे कि जापान को आत्मसमर्पण करने पर मजबूर होना पड़ा.

हाइड्रोजन बम ज्यादा खतरनाक

परमाणु विशेषज्ञों के अनुसार, एक हाइड्रोजन बम परमाणु बम से 1,000 गुना ज़्यादा शक्तिशाली हो सकता है. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने 1954 में देश के भीतर एक हाइड्रोजन बम का परीक्षण करके इसकी भयावहता देखी थी. कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी बर्कले में एटम इंजीनियरिंग के प्रोफेसर एडवर्ड मोर्स के अनुसार, हाइड्रोजन बम से बड़ा विस्फोट होता है.

हाइड्रोजन बम को थर्मोन्यूक्लियर बम भी कहते हैं. इस फ्यूजन बम को एक विकिरण कंटेनर के अंदर रखा जाता है, जिसमें ट्रिटियम या ड्यूटिरियम जैसे संलयन ईंधन होते है. ये दोनों हाइड्रोजन के आइसोटोप हैं. विस्फोटक सामग्री, विखंडन बम विस्फोट और प्राथमिक प्रतिक्रिया का कारण बनता है. यह फिर संलयन ईंधन को संकुचित करता है जो कि माध्यमिक प्रतिक्रिया के रूप में आगे की परमाणु श्रृंखला प्रतिक्रिया यानी चेन रिएक्शन का कारण बनता है.