रेलवे अफसरों को इमरजेंसी सायरनों की जानकारी नहीं

रेलवे अफसरों को इमरजेंसी सायरनों की जानकारी नहीं
रेलवे अफसरों को इमरजेंसी सायरनों की जानकारी नहीं

रेल दुर्घटना या अन्य इमरजेंसी होने पर रेलवे रेस्क्यू करने में फेल साबित हो सकता है, क्योंकि अफसरों को सायरन संकेतों (कोड) की जानकारी नहीं है। कोआर्डिनेशन का अभाव है। रिस्पांस टाइम सही नहीं है। तकनीकी कमियां हैं। यह चौंकाने वाली जानकारी नॉर्दर्न रेलवे लखनऊ मंडल की ओर से 19 दिसंबर को चारबाग रेलवे स्टेशन पर हुए मॉक ड्रिल में सामने आई।

डीआरएम सुनील कुमार शर्मा इमरजेंसी सायरन संकेतों को सही तरीके से नहीं बता पाए। उन्होंने जूनियर अफसरों को नियमावली देखने को कहा। चारबाग स्टेशन डायरेक्टर प्रशांत कुमार भी स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए।मॉक ड्रिल के दौरान ट्रेन के डिब्बों में ड्रिलिंग कर अंदर फंसे लोगों को निकाला गया।

2 घंटे तक चला मॉक ड्रिल

नवरत्न रेलवे की ओर से आयोजित इस मॉक ड्रिल में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, जीआरपी, आरपीएफ, स्थानीय पुलिस और मेडिकल टीमें शामिल रहीं। करीब 2 घंटे तक चले अभ्यास में डमी यात्रियों को पलटी हुई ट्रेन और एक-दूसरे पर चढ़ी बोगियों में बैठाकर रेस्क्यू ऑपरेशन का अभ्यास कराया गया। इस दौरान डीआरएम, स्टेशन डायरेक्टर, सीनियर डीसीएम, डीसीएम समेत रेलवे के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

रेस्क्यू एजेंसियों ने मानीं कमियां

मॉक ड्रिल समाप्त होने के बाद सभी एजेंसियों ने अपनी-अपनी कमियों की पहचान की। एनडीआरएफ के सीनियर अधिकारी अनिल कुमार पाल ने कहा कि अभ्यास के दौरान कुछ तकनीकी और समन्वय से जुड़ी कमियां सामने आई हैं, जिन्हें दूर किया जाएगा।

एसडीआरएफ अधिकारी मिथिलेश तिवारी ने बताया कि रिस्पांस टाइम में कमी दिखी। उनके अनुसार, पहले कमांडेंट को घटना की सूचना देकर औपचारिक प्रक्रिया दर्ज करानी चाहिए थी।उसके बाद मौके पर पहुंचना अधिक प्रभावी होता, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

सायरन के संकेतों का जवाब नहीं दे पाए अफसर

इमरजेंसी में स्टेशन पर बजने वाले सायरन संकेतों को लेकर डीआरएम सुनील कुमार शर्मा से सवाल किया गया तो वह जानकारी नहीं दे पाए। जूनियर अधिकारी को नियमावली देखकर जवाब देने के लिए कहा। बाद में यह कहते हुए टाल दिया कि सारी जानकारी प्रेस नोट में दी जाएगी।

उनके साथ मौजूद जूनियर अफसर ने सायरन संकेतों को लेकर कुछ जानकारी दी। चारबाग स्टेशन डायरेक्टर प्रशांत कुमार भी इसको लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दे पाए।

दुर्घटना के समय सायरन बजाने के अन्य नियम

रेलवे आपदा प्रबंधन नियमों के अनुसार सायरन की आवाज और संख्या से दुर्घटना का स्थान और गंभीरता स्पष्ट होती है। दुर्घटना की सूचना मिलते ही या घटना देखते ही तुरंत निर्धारित सायरन कोड बजाया जाता है। सभी कर्मचारियों और एजेंसियों को अलर्ट करने के लिए सायरन कोड को लगभग हर 5 मिनट के अंतराल पर दोहराया जाता है।

आपदा की पुष्टि होते ही 80 प्रतिशत अधिकारी और पर्यवेक्षी कर्मचारी दुर्घटना स्थल पर भेजे जाते हैं, जबकि 20 प्रतिशत अधिकारी मुख्यालय के कंट्रोल रूम में रहकर समन्वय करते हैं। ​​​सबसे वरिष्ठ अधिकारी मौके पर जाकर रेस्क्यू और राहत कार्य की निगरानी करते हैं, जबकि अन्य वरिष्ठ अधिकारी कंट्रोल रूम से संचालन और समन्वय संभालते हैं।

दुर्घटना में मृत यात्रियों के आश्रितों, गंभीर रूप से घायलों और सामान्य घायलों को रेलवे नियमों के अनुसार तत्काल अनुग्रह राशि प्रदान की जाती है।