भाजपा के नए अध्यक्ष के लिए , आरएसएस की मुहर कितनी है जरूरी

How important is the seal of RSS for the new president of BJP?

भाजपा के नए अध्यक्ष के लिए , आरएसएस की मुहर कितनी है जरूरी
भाजपा के नए अध्यक्ष के लिए , आरएसएस की मुहर कितनी है जरूरी

दिल्ली चुनाव के लिए वोटिंग हो गई,छोटे-बड़े चुनाव आगे भी जारी रहेंगे

भाजपा सहित सभी राजनीतिक दल अब बिहार विधानसभा चुनाव पर फोकस करेंगे। इससे पहले छत्तीसगढ़ और हरियाणा निकाय चुनाव के लिए भी वोटिंग होनी है। भाजपा को जनवरी तक ही अपना नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लेना था, लेकिन कहीं विधानसभा चुनाव और कहीं निकाय चुनाव की वजह से मंडल और प्रदेश स्तर के चुनाव में देरी हुई। भाजपा के संविधान के अनुसार,अध्यक्ष के चुनाव के लिए कम से कम 50% राज्य इकाइयों में संगठन के चुनाव पूरे होने जरूरी हैं। अभी कई राज्यों में भाजपा के संगठन की चुनाव प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। जब यह कम से कम 50% पूरी होगी, तभी राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव किया जाएगा
छत्तीसगढ़ में 11 फरवरी को निकाय चुनाव की वोटिंग होनी है। भाजपा का स्थानीय संगठन उसी में व्यस्त है। इसके बाद छत्तीसगढ़ में संगठन का चुनाव होगा। हरियाणा में भी अभी भाजपा संगठन के चुनाव की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। वहां तो पार्टी का सदस्यता अभियान ही देर से शुरू हुआ और देर तक चला। विधानसभा चुनाव की वजह से सदस्यता अभियान में देरी हुई। अब वहां 2 मार्च को निकाय चुनाव के लिए वोटिंग होगी। उसके बाद ही हरियाणा में पार्टी संगठन के चुनाव पर काम होगा। मध्य प्रदेश में भाजपा ने संगठन चुनाव के तहत सभी जिला अध्यक्षों की घोषणा तो कर दी है, लेकिन अभी वहां भी प्रदेश अध्यक्ष तय होना बाकी है। उत्तर प्रदेश में भी अभी संगठन चुनाव की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। उत्तराखंड में भी निकाय चुनाव बीच में आ गए थे, 
भाजपा में जब भी पुराने अध्यक्ष का कार्यकाल खत्म होता है तो नए अध्यक्ष को लेकर कयासबाजी और तेज हो जाती है। लेकिन इस बार यह चुनाव कुछ अलग है क्योंकि यह दो बार लोकसभा में पार्टी को मिले लगातार बहुमत के बाद सरकार के साए में हो रहा है। लोकसभा चुनाव के वक्त कहा गया कि भाजपा और उसके वैचारिक संगठन आरएसएस के बीच सबकुछ ठीक नहीं है और संघ के स्वयंसेवकों ने पहले की तरह ग्राउंड पर काम नहीं किया। चुनाव के बाद भी जब केंद्र में भाजपा की सरकार बन गई, तब संघ प्रमुख मोहन भागवत के कुछ बयानों को भाजपा और संघ के रिश्तों से जोड़कर देखा जा रहा है।
हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में आरएसएस काफी सक्रिय रहा। इसी तरह दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी संघ पूरी तरह सक्रिय रहा। इस बार कहा जा रहा है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन में संघ की अहम भूमिका होगी और संघ बैकग्राउंड वाले किसी नेता के अध्यक्ष बनने के चांस ज्यादा हैं। संघ से जुड़े एक नेता ने अनौपचारिक बातचीत में बताया कि लोकसभा चुनाव के बाद नतीजों के विश्लेषण में पाया गया कि कई राज्यों में जहां पहले संगठन मजबूत हुआ करता था, वहां यह काफी कमजोर हुआ है। कई जगह नेता कार्यकर्ताओं को उत्साहित नहीं कर पाए थे..