Dr Uday Prtap Singh Birthday : मुलायम सिंह यादव के गुरु जी डा0 उदय प्रताप सिंह यादव जन्मदिन पर विशेष !

डा0 उदय प्रताप सिंह यादवः समाजवादी आदर्शों को आचरण में जीने वाले महान कवि सामाजिक समानता, आर्थिक समानता और धर्मों की समानता के बिना मजबूत भारत की परिकल्पना अधूरी

Dr Uday Prtap Singh Birthday :  मुलायम सिंह यादव  के गुरु जी डा0 उदय प्रताप सिंह यादव जन्मदिन पर विशेष !

डा0 उदय प्रताप सिंह यादवः समाजवादी आदर्शों को आचरण में जीने वाले महान कवि   
सामाजिक समानता, आर्थिक समानता और धर्मों की समानता के बिना मजबूत भारत की परिकल्पना अधूरी: उदय प्रताप सिंह
कवि ,साहित्यकार और राजनेता डा0 उदय प्रताप सिंह यादव के लिए श्री कृष्ण जन्माष्टमी का दिन बहुत खास हैं, क्योंकि यह भगवान श्री कृष्ण के साथ-साथ उनका भी जन्मदिवस है। वे जन्माष्टमी को जीवन का 93वां वसंत पूरा करेंगे। दस्तावेजों में उनका जन्म 18 मई 1932 को ग्राम गढ़िया छिनकौरा ,जनपद मैनपुरी उत्तर प्रदेश में होना बताया गया है,लेकिन उनके मुताबिक यह तिथि प्राइमरी टीचर के अनुमानों पर आधाराति है,जबकि उनकी वास्तविक जन्मतिथि भादों महीने की अष्टमी तिथि है। और इसे दैवीय संयोग ही कह सकते हैं कि केवल जन्मतिथि ही नहीं, नक्षत्रों के मामले में भी भगवान कृष्ण और उनके के मध्य समानता है।
कविताओं में बसता हिन्दुस्तान का दिल


सबसे दिलचस्प बात यह है कि भगवान श्री कृष्ण की भांति डा0 उदय प्रताप भी बहुआयामी व्यक्तित्व के मालिक हैं। वे एक ऐसी शख्सियत हैं जिनका मूल्यांकन विभिन्न क्षेत्रों में उनके द्वारा किए जा रहे अवदान के लिए किया जायेगा। इसे उनके व्यक्तित्व की विराट संरचना कहें या फिर उच्च प्रतिभा सम्पन्नता, उन्होंने जिस भी विधा में कार्य किया, हमेशा सफलता के एक नए शिखर को छुआ है। उनकी कविताओं में प्रेम ,करूणा संघर्ष और सौहार्द की अभिव्यक्ति मिलती है। मानवीय संवेदना की गहरी समझ ही उन्हें आम कवियों और शायरों से बिल्कुल जुदा बनाती है। शायद यही वजह रही कि उनकी कविताएं कवि सम्मेलनों में लोगों के आकर्षण का केन्द्र होती हैं।


उदय प्रताप सिंह को उनकी कविताओं को लेकर अंतराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति मिली । उन्होंने भारत और अन्य जगहों पर कवि सम्मेलन में भाग लिया है। सूरीनाम में 1993 में आयोजित विश्व हिन्दी सम्मेलन के लिए प्रतिनिधि मण्डल का उन्होंने नेतृत्व किया। वे देश विदेश में पिछले पैंतालिस वर्षों से कवि सम्मेलनों में जाते रहे हैं और भाषायी एकता का मुद्दा उठाते रहे हैं। उन्होंने कविताओं के अलावा कई गजलों और गीतों की भी रचना की है।  उन्होने समाजवादी पार्टी के लिए कई गीतों की भी रचना की है। जिसमें ये समाजवादी झण्डा, साइकिल है सवारी खूब,मन से हैं मुलायम जैसे गीत शामिल हैं।
समाजवादी चिन्तन की विराट धारा


एक क्षेत्र ऐसा है जिसमें उनके योगदान को उतनी मान्यता अभी तक नही मिल पाई है जिसके वे हकदार रहे हैं, वह क्षेत्र है समाजवादी चिन्तन का। वर्तमान दौर में समाजवादी चिन्तन को लेकर जितनी गहरी समझ डा0 उदय प्रताप सिंह के पास है, वैसी समझ किसी और के पास नहीं हैं। उनका मानना है कि समाजवादी सिद्धान्त मौजूदा दौर में और भी अधिक प्रासंगिक हैं। उनके अनुसार समाजवादी सिद्धान्त में ‘इकुअलटी’(समानता) का विशेष महत्व है। वे इसे तीन आधारों पर विभाजित करते है, सोशल इकुअलटी(सामाजिक समानता) , इकोनामिक इकुअलटी(आर्थिक समानता ) और रिलीजियस इकुअलटी(धर्मों की समानता) है। उनका मानना है कि इन समाजवादी सिद्धान्तो के बिना मजबूत भारत की परिकल्पना अधूरी रहेगी। उनकी इन्हीं बातों की अभिव्यक्ति उनकी कविताओं में भी मिलती हैं,जिसमें वे कहते हैंः-‘‘न मेरा है न तेरा है,ये हिन्दुस्तान सबका है,समझ में न आये ये बात तो नुकसान सबका है।’’


शिक्षा और शिक्षण
माता पुष्पा यादव व पिता डॉ॰ हरिहर सिंह चौधरी ग्राम गढ़िया छिनकौरा ,जनपद मैनपुरी उत्तर प्रदेश के यहां जन्मे उदय प्रताप सिंह बचपन से तीक्ष्ण बुद्धि के थे। डा0 उदय प्रताप सिंह सेंट जॉन कॉलेज , आगरा विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में और हिंदी में एमए की डिग्री हासिल करने के बाद, सन 1958 में जैन इंटर कॉलेज, करहल में अंग्रेजी के व्याख्याता बन गए। 20 मई 1958 को डॉ॰ चैतन्य यादव के साथ उनका विवाह हुआ। उनके एक बेटा व तीन बेटियाँ हैं।
जब डा0 उदय प्रताप सिंह करहल के जैन इण्टर कालेज में अंग्रेजी के प्रवक्ता हुआ करते थे, तब समाजवादी पार्टी के संस्थापक, मुलायम सिंह यादव उनके छात्र हुआ करते थे। वे अध्यापन के साथ-साथ कवि सम्मेलनों में कविता पाठ भी किया करते थे। 1960 में करहल (मैनपुरी) के जैन इण्टर कॉलेज में कवि सम्मेलन आयोजित हुआ था। उसी दौरान वीर रस के विख्यात कवि दामोदर स्वरूप ‘विद्रोही’ ने अपनी प्रसिद्ध कविता दिल्ली की गद्दी सावधान! सुनायी जिस पर खूब तालियाँ बजीं। तभी यकायक पुलिस का एक दरोगा मंच पर चढ़ आया और विद्रोही जी को डाँटते हुए बोला-‘बन्द करो ऐसी कविताएँ’ जो सरकार के खिलाफ हैं। उसी समय कसे (गठे) शरीर का एक लड़का बड़ी फुर्ती से मंच पर चढ़ा और उसने उस दरोगा को उठाकर पटक दिया। विद्रोही जी ने कवि सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे उदय प्रताप सिंह से पूछा-‘ये नौजवान कौन है?’ तो पता चला कि यह मुलायम सिंह यादव थे जो उस समय जैन इण्टर कॉलेज के छात्र थे और उदय प्रताप सिंह उनके गुरु हुआ करते थे। इस घटना के बाद मुलायम सिंह यादव डा0 उदय प्रताप सिंह के सबसे प्रिय शिष्य बन गये। 


राजनैतिक जीवन और उपलब्धियां


कवि उदय प्रताप सिंह की राजनीतिक यात्रा की शुरूआत जनता दल से हुई जब साल 1989 में उन्हें मैनपुरी लोकसभा क्षेत्र से जनता दल का उम्मीदवार बनाया गया और वे भारी मतों से चुनाव जीतने में कामयाब रहे। साल 1991 में वे दूसरी बार समाजवादी जनता पार्टी के टिकट पर मैनपुरी से चुनाव जीते और 1992 में जब समाजवादी पार्टी का गठन हुआ तो वे सपा के संस्थापक सदस्य बने। साल 1996 में हुए लोकसभा चुनाव में उन्होंने अपनी सीट अपने पूर्व शिष्य मुलायम सिंह यादव,के लिए छोड़ दी थी। बाद में वर्ष 2002 में उन्होंने समाजवादी पार्टी की ओर से उत्तर प्रदेश से राज्य सभा का प्रतिनिधित्व किया। अपने संसदीय जीवन में वे विभिन्न संसदीय समितियों व शैक्षिक निकायों के सदस्य रहे ।
साल 2012 में बनी अखिलेश यादव सरकार ने उन्हें उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष बनाया। वे हिंदुस्तानी एकेडमी प्रयागराज के अध्यक्ष भी रह चुके है। उन्हें पैरामारी बू विश्वविद्यालय सूरीनाम द्वारा आचार्य की मानद उपाधि दी गई है। डॉ॰ शिवमंगल सिंह सुमन सम्मान,शायरे-यक़ज़हती सम्मान, विद्रोही स्मृति सम्मान आदि से सम्मानित किया जा चकु है। बावजूद इसके उपलब्धियों के कई पड़ाव उनका इंतजार कर रहे हैं। वे अखिल भारतवर्षीय यादव महासभा जैसी सामाजिक संस्थाओं के लम्बे समय से अध्यक्ष हैं।