आवारा कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के 10 बड़े निर्देश

आवारा कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के 10 बड़े निर्देश
आवारा कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के 10 बड़े निर्देश

नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट ने शैक्षणिक केंद्रों और अस्पतालों जैसे संस्थागत क्षेत्रों में कुत्तों द्वारा काटे जाने के मामलों में ‘‘खतरनाक वृद्धि'' पर गौर करते हुए निर्देश दिया कि ऐसे कुत्तों को निर्दिष्ट आश्रय स्थलों में भेजा जाना चाहिए. न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया की विशेष पीठ ने आवारा कुत्तों के मामले में कई निर्देश पारित किए. उसने प्राधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि राजमार्गों और एक्सप्रेसवे से मवेशियों और अन्य आवारा पशुओं को हटाना एवं उनका निर्दिष्ट आश्रय स्थलों में स्थानांतरण सुनिश्चित किया जाए.

सुप्रीम कोर्ट के आदेस्कूल, कॉलेज और अस्पताल परिसर से आवारा कुत्तों को हटाएंश के 10 बड़ी बातें


1. सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में स्कूल, अस्पताल, बस अड्डे, रेलवे स्टेशन और स्टेडियम को कुत्तों से मुक्त करने का आदेश  दिया.

2. सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश 8 हफ्ते में रिपोर्ट दाखिल करें, अदालत ने कहा, देरी बर्दाश्त नहीं.

3. अदालत ने साफ किया, पकड़े गए कुत्तों को उसी जगह वापस नहीं छोड़ा जाएगा जहां से पकड़ा गया.

4. हर संस्थान में एक नोडल अधिकारी नियुक्त होगा, जो परिसर की सफाई और सुरक्षा का जिम्मेदार होगा.

5. सभी अस्पतालों में एंटी रैबीज वैक्सीन और इम्युनोग्लोब्युलिन हमेशा उपलब्ध रहना चाहिए.

6.  स्कूलों में छात्रों को जानवरों से बचाव और फर्स्ट एड की ट्रेनिंग देने का निर्देश.

7. अदालत ने कहा, सभी संस्थानों को दीवार और गेट से घेरा जाए, ताकि कुत्ते अंदर न घुस सकें.

8. सुप्रीम कोर्ट ने हाईवे और सड़कों से गाय-बैल व अन्य जानवरों को हटाने का भी आदेश दिया.

9. हर हाइवे पर हेल्पलाइन नंबर और निगरानी टीमें 24 घंटे तैनात करने का निर्देश.

10. सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी,आदेश न मानने पर अवमानना कार्रवाई होगी, अगली सुनवाई 13 जनवरी 2026 को.

देश में स्कूल, कॉलेज और नेशनल हाईवे से हटाए जाएंगे आवारा कुत्ते, सुप्रीम  कोर्ट ने दिया बड़ा फैसला – amritvarshanews.in

सवाल-1: स्कूलों, अस्पतालों, सड़कों से कब तक हट जाएंगे आवारा कुत्ते?

जवाबः जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एवी अंजारिया की बेंच ने आदेश में कहा कि इस फैसले को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए…

  • कोर्ट ने निर्देश दिया कि राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश अपने संबंधित स्थानीय या नगरपालिका अधिकारियों के जरिए दो हफ्ते के भीतर स्कूलों, अस्पतालों, खेल परिसरों, बस स्टैंड, डिपो और रेलवे स्टेशन को चिह्नित करेंगी।
  • जिला मजिस्ट्रेट की निगरानी में नगरपालिका अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि कैम्पस में ऐसी बाड़ेबंदी हो जाए, जिससे आवारा कुत्तों को वहां घुसने से रोका जा सके।
  • सभी नेशनल और स्टेट हाईवे पर जगह-जगह हेल्पलाइन नंबर दिखाए जाएंगे, जिससे यात्री आवारा पशुओं की सूचना दे सकें। इन हेल्पलाइनों को स्थानीय पुलिस, NHAI और जिला प्रशासन के कंट्रोल रूम से जोड़ा जाएगा।

अदालत ने कहा कि निर्देशों को पूरे भारत में समान रूप से लागू किया जाना चाहिए। 8 हफ्ते बाद 13 जनवरी की सुनवाई में सभी मुख्य सचिव और NHAI के अध्यक्ष अनुपालन प्रमाण पत्र दाखिल करेंगे। जिसमें हाईवे से आवारा पशुओं को हटाने और शेल्टर होम, गश्ती दलों का गठन और हेल्पलाइन की स्टेटस रिपोर्ट होगी।

सवाल-2: अगर 13 जनवरी के बाद भी कुत्ते दिख जाते हैं तो किसकी जिम्मेदारी होगी?

जवाबः सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि स्कूल, अस्पताल, रेलवे स्टेशन जैसी हर चिह्नित जगह के प्रबंधक रखरखाव और सफाई के लिए जिम्मेदार एक नोडल अधिकारी को नॉमिनेट करें और यह सुनिश्चित करें कि आवारा कुत्ते कैम्पस में न प्रवेश करने पाएं और न वहां घूमते दिखें।

नामित अधिकारी का नाम संस्थान के गेट पर लिखा जाएगा और उस इलाके के नगर निकाय या प्राधिकरण को भी सूचित किया जाएगा। स्थानीय नगरपालिका प्राधिकरण और पंचायतें ऐसे सभी कैम्पस का हर तीन में महीने में कम से कम एक बार नियमित निरीक्षण करेगी। जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि वहां कोई आवारा कुत्ता तो मौजूद नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी कि इसका सख्ती से पालन करना जरूरी है वरना अधिकारियों को व्यक्तिगत तौर पर जिम्मेदार ठहराया जाएगा।

आदेश में कहा गया है कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिव इन निर्देशों का कड़ाई से पालन कराएं। वे अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में बार-बार होने वाली घटनाओं के लिए संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह ठहराएंगे।

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सवाल-3: सुप्रीम कोर्ट ने जोर देकर क्यों कहा- जहां से पकड़ें, वहां न छोड़ें कुत्ते?

जवाबः सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चिह्नित स्थानों से कुत्तों को उठाकर उनकी नसबंदी की जाए और फिर शेल्टर होम में भेजा जाए। आवारा कुत्तों को उसी स्थान पर वापस नहीं छोड़ा जाएगा, जहां से उन्हें उठाया गया था। अगर ऐसा करने की इजाजत दी गई तो इन जगहों से आवारा कुत्तों से मुक्त करवा पाने का मकसद पूरा नहीं हो पाएगा।

अदालत ने कहा कि उठाए गए मवेशियों और अन्य आवारा पशुओं को उचित शेल्टर होम या गौशालाओं में रखा जाएगा। उन्हें सभी आवश्यक भोजन, पानी और पशु चिकित्सा देखभाल प्रदान की जाएगी।

इससे पहले 22 अगस्त को इसी बेंच ने कहा था कि कुत्तों को कीड़े की दवाई देने, नसबंदी करने और एंटी-रेबीज वैक्सीन लगाने के बाद उसी इलाके में वापस छोड़ा जा सकता है। सिर्फ रेबीज से संक्रमित और आक्रामक स्वभाव वाले कुत्तों को वैक्सीन लगाकर अलग डॉग शेल्टर में ही रखा जाएगा।

सवाल-4: सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को sc: रेलवे स्टेशनों और स्कूलों के पास से आवारा कुत्तों को हटाएंलेकर इतना सख्त फैसला क्यों सुनाया?

जवाबः वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन यानी WHO के मुताबिक दुनिया में हर साल 55 हजार से ज्यादा लोगों की मौत रेबीज से होती है। इनमें से हर तीसरा यानी करीब 18 से 20 हजार मौतें भारत में होती हैं। भारत में डॉग बाइट से मरने वाले आधे से ज्यादा 15 साल से कम उम्र के बच्चे हैं।

केंद्रीय पशुपालन मंत्री एसपी सिंह बघेल ने 1 अप्रैल 2025 को लोकसभा में बताया था कि 2024 में देशभर में कुत्तों के काटने के करीब 37 लाख 15 हजार मामले दर्ज हुए। जबकि साल 2023 में ऐसे 30 लाख 52 हजार मामले सामने आए थे।

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सवाल-5: क्या होता है रैबीज और क्या इसका कोई इलाज नहीं?

जवाबः बुलंदशहर जिले में फराना गांव के रहने वाले 22 साल के बृजेश कबड्डी के स्टेट लेवल के खिलाड़ी थे। करीब दो महीने पहले एक कुत्ते के बच्चे को नाले से निकालने के दौरान उसने बृजेश की उंगली में काट लिया। कुछ दिन बाद उन्हें ट्रेनिंग के दौरान उंगली में सुन्नपन महसूस हुआ।

जल्द ही बृजेश को हाइड्रोफोबिया हो गया यानी पानी से डर लगने लगा। तब डॉक्टर्स को रेबीज का शक हुआ। इलाज शुरू हुआ, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। बृजेश की मौत हो गई।

रेबीज लीजावायरस (Lyssavirus) नाम के वायरस से होने वाली बीमारी है। WHO के मुताबिक, इंसानों में 99% मामलों में रेबीज का संक्रमण कुत्तों से होता है। ये वायरस इंसानों में तीन तरीके से आता है-

  • रेबीज से संक्रमित जानवर के काटने या खरोंच से।
  • संक्रमित जानवर की लार के इंसानों के खुले घाव या मुंह, नाक, आंख की ऊपरी झिल्ली के संपर्क में आने से।
  • कुछ मामलों में रेबीज से संक्रमित किसी अन्य इंसान के संपर्क में आने से।

रेबीज के वायरस की खासियत है कि ये इंसान के शरीर में घुसने के बाद खून के बजाय सीधे नर्वस सिस्टम पर हमला करता है। नर्वस सिस्टम का केंद्र हमारा दिमाग है।

रेबीज संक्रमित को पहले पानी से डर लगना शुरू होता है। पानी पिलाने पर उसका गला चोक होने लगता है। इसके बाद हवा और रोशनी से डर लगने लगता है। इसके अलावा घबराहट, भ्रम, बहुत ज्यादा लार बनना और आखिर में पैरालिसिस यानी लकवा मार जाता है।

एक बार लक्षण आने के बाद रेबीज से पीड़ित इंसान को पूरी तरह ठीक करना लगभग नामुमकिन है। यानी वायरस को खत्म करने का कोई तरीका नहीं है।