बिहार में बदलने जा रही व्यवस्था , बिहार में पिछले 30 साल में सबसे ज्यादा मतदान किस बात का संकेत?

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बिहार में बदलने जा रही व्यवस्था   , बिहार में पिछले 30 साल में सबसे ज्यादा मतदान किस बात का संकेत?
बिहार में बदलने जा रही व्यवस्था   , बिहार में पिछले 30 साल में सबसे ज्यादा मतदान किस बात का संकेत?

बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान संपन्न हो गया। रिकॉर्ड वोटिंग दर्ज की गई। 18 जिलों की 121 विधानसभा सीटों पर मतदान समाप्त होने तक अंतिम रूप से 64.46 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई है। हालांकि ये आंकड़ा थोड़ा-बहुत बढ़ने का अनुमान है। दूसरे चरण का मतदान 11 नवंबर को होगी और मतगणना 14 नवंबर को की जाएगी। बिहार में पहले चरण के मतदान में कई क्षेत्रों में सुबह से ही लंबी कतारें देखी गईं। चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार, ये मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ, जिसके लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। पहले चरण में हुए इस मतदान के साथ ही 1314 उम्मीदवारों की राजनीतिक किस्मत ईवीएम (EVM) में बंद हो गई। इनमें प्रमुख रूप से राजद नेता तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, और उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा सहित राज्य सरकार के 16 मंत्रियों का भविष्य शामिल है। अब सभी की निगाहें 14 नवंबर को होने वाली मतगणना पर टिकी हैं, जब ये साफ होगा कि इस बंबर वोटिंग का फायदा किस गठबंधन को मिला है।

बंपर वोटिंग पर महागठबंधन के नेताओं का बयान

वहीं, VIP पार्टी के नेता और महागठबंधन के उपमुख्यमंत्री उम्मीदवार मुकेश सहनी ने कहा कि बिहार में बदलाव की लहर है। बंपर वोटिंग हो रही है। मुझे उम्मीद है कि बिहार में बदलाव होगा। महागठबंधन की सरकार बनेगी। mukesh sahani as deputy cm candidate for mahagathbandhan and irony of bihar  election votebank politics | Jansatta वहीं, कांग्रेस नेता अखिलेश प्रसाद सिंह ने महागठबंधन दो-तिहाई बहुमत से सरकार बनाने जा रहा है। मैं पहले ही कहा करता था कि बिहार चौंकाने वाला परिणाम देने वाला है और आज जिस प्रकार की खबरें आ रही हैं उससे साफ है कि सत्ता में परिवर्तन हो रहा है।

 

बिहार के लोग सियासत की पुरपेंच गलियों में चलना बखूबी जानते

साल 1947 में 15 अगस्त को देश का अंग्रेजों से हमेशा के पीछा छूटा और दुनिया के नक्शे पर पैदा हुए मुल्क ने विभाजन के घाव लिए विकास की राह पर चलना शुरू किया। बिहार प्रांत ने भी कंधे से कंधा मिलाकर कदम बढ़ाना शुरू किया। बिहार के लोग सियासत की पुरपेंच गलियों में चलना बखूबी जानते हैं। उन्हें ये भी पता होता है कि गली के आगे बढ़ते नुक्कड़ पर कौन सी मंजिल मिलेगी। उड़ती चिड़िया के पर गिनने में महारत रखने वाले बिहार के लोग ये भी जानते हैं कि मौजूदा वक्त में बिहार बदहाल है, मानवीय सूचकांक जितने भी मापदंड हैं, उनमें बिहार लगातार फिसलता या लड़खड़ाता नजर आता है लेकिन सवाल पैदा होता है क्यों?

90 के दशक में लालू यादव के दौर में ‘सामाजिक न्याय की राजनीति’ का दौर शुरू हुआ

Lalu Yadav Is Sure Of Opposition Bloc INDIA's Victory In 2024: End of BJP  Confirmed

कभी-कभी ये कहा जाता है कि 90 के दशक में लालू प्रसाद यादव के दौर में ‘सामाजिक न्याय की राजनीति’ का दौर शुरू हुआ, जिसमें पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को राजनीतिक सशक्तिकरण मिला। लेकिन क्या धरातल की सच्चाई को बयां करता है? आज भी बिहार में जाति और धर्म के ध्रुवीकरण के नाम पर नेताओं का चुनाव होता है। राजनीतिक दल टिकट भी जाति और धर्म का आधार बनाकर बांट रही हैं। वैसे तो ये त्रासदी पूरे देश की है लेकिन इस त्रासदी में बिहार अव्वल नंबर पर है।