राधानगर में मिट्टी खनन माफियाओं का जलवा बरकरार, रातभर चलता अवैध कारोबार

राधानगर में मिट्टी खनन माफियाओं का जलवा बरकरार, रातभर चलता अवैध कारोबार

अजय सिंह 
फतेहपुर ।राधानगर थाना क्षेत्र में मिट्टी खनन माफियाओं की सक्रियता लगातार बढ़ती जा रही है। क्षेत्र के कई गांवों में खुलेआम सरकारी भूमि, ग्राम समाज, तालाबी नंबर, गौचर और पशुचर की जमीनों से मिट्टी की अवैध खुदाई धड़ल्ले से की जा रही है। चुरियानी, बलीपुर, लक्ष्मणपुर, फुलवामऊ, बड़नपुर सहित आसपास के इलाकों में रात के अंधेरे में खनन माफिया पूरी तैयारी के साथ मिट्टी खोदते हैं और उसे ट्रैक्टर-ट्रालों व डंपरों में भरकर शहर के अंदर ऊंचे दामों में बेच देते हैं।स्थानीय सूत्रों के अनुसार, एक ट्राली मिट्टी 3,000 से 5,000 रुपये में बेची जा रही है। यह पूरा कारोबार संगठित रूप से चलता है, जिसमें माफिया अपनी पहचान छिपाने के बजाय खुलेआम बोलेरो, थार, ऑल्टो जैसी लग्जरी गाड़ियों और बाइक पर सवार होकर क्षेत्र में घूमते दिखाई देते हैं। इतना ही नहीं, इनकी मौजूदगी राधानगर थाने के पास तक आसानी से देखी जा सकती है।
थाने के सामने से निकलती हैं मिट्टी भरी गाड़ियाँ, फिर भी खामोश है सिस्टम! 
स्थानीय लोगों का कहना है कि शाम होते ही खनन माफिया सक्रिय हो जाते हैं और रात 8 बजे से लेकर सुबह 8 या 9 बजे तक मिट्टी खनन का यह खेल लगातार चलता है। राधानगर थाने के सामने से मिट्टी से लदी गाड़ियाँ गुजरती हैं, मगर पुलिस प्रशासन खामोश रहता है।सूत्रों का दावा है कि प्रत्येक माह थाने में बैठे जिम्मेदार अधिकारी तक “महीनवारी” पहुँचाई जाती है। यदि किसी कारण से यह तय रकम समय पर नहीं पहुँचती तो गाड़ियों को रोक लिया जाता है, फिर आरटीओ या खनन विभाग का चालान करवाकर दिखावटी कार्रवाई की जाती है ताकि सबकुछ नियमों के तहत दिखे।
रात के अंधेरे में वसूली का खेल, थाना बना अघोषित केंद्र 
जानकारी के अनुसार, रात के समय थाने में केवल एक गार्ड, कुछ सिपाही और दीवान ड्यूटी पर रहते हैं, जबकि पूरा कामकाज एक निजी व्यक्ति के सहारे चलता है। बताया जाता है कि थाना प्रभारी ने एक ‘रमवा’ नामक व्यक्ति को अपनी निजी गाड़ी चलाने के लिए रखा है। यही व्यक्ति क्षेत्र में हो रहे सभी अवैध कार्यों की जानकारी थाना प्रभारी तक पहुँचाता है और दलाली से लेकर वसूली तक का पूरा नेटवर्क इसी के माध्यम से संचालित होता है।स्थानीय सूत्रों ने बताया कि यह निजी व्यक्ति रात में गाड़ियों को रोककर “रात का शुल्क” लेता है और फिर थाने के बैरियर को खुलवाकर वही वाहन बिना किसी रुकावट के शहर के अंदर प्रवेश करा देता है। सवाल उठता है कि जब पुलिस अधीक्षक द्वारा पहले ही स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि शहर के अंदर अवैध मिट्टी भरी गाड़ियों का प्रवेश वर्जित है, तो आखिर यह गाड़ियाँ थाने के सामने से कैसे निकल रही हैं?
माफिया राज में सक्रिय ‘चार नाम’ — क्षेत्र में बना एक बड़ा सिंडिकेट 
स्थानीय लोगों ने बताया कि क्षेत्र में चार नाम विशेष रूप से सक्रिय हैं — पाल, तिवारी, यादव और एक ठाकुर । ये चारों माफिया आपसी गठजोड़ और “प्रोटोकॉल” के साथ पूरे क्षेत्र में अवैध मिट्टी खनन का कारोबार चला रहे हैं। इनके पास खुद की गाड़ियाँ और प्राइवेट टीम है, जो इलाके में न केवल खनन करवाती है, बल्कि पुलिस और स्थानीय प्रशासन से तालमेल भी बनाए रखती है।इनका नेटवर्क इतना मजबूत है कि क्षेत्र के हर हिस्से में इनकी पहुँच है। हर गाड़ी, हर ट्राली और हर डंपर का हिसाब-किताब तय दर पर चलता है। सूत्रों के मुताबिक, ये लोग समय से महीनवारी पहुँचाकर पूरे सिस्टम को मैनेज करते हैं और किसी को बोलने की हिम्मत तक नहीं होती।
स्थानीय लोगों में आक्रोश, प्रशासन से जांच की मांग 
ग्राम समाज की जमीनों से हो रहे इस खुलेआम खनन को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार खनन से तालाब और चरागाह जैसी जमीनें खत्म होती जा रही हैं, जिससे पशुओं के लिए चारे और जल की समस्या गहराती जा रही है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि राधानगर थाने की तत्काल जांच कराई जाए और जो भी पुलिसकर्मी या अधिकारी इस अवैध कारोबार में संलिप्त पाए जाएं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।